इंडियन प्रेस, लखनऊ
पुस्तकें 16
महासरः-ए-दर्रह-ए दनियाल
आलमी अज़ीम दर्द दनियाल के गुज़िश्ता मुहासिरीं पर मुख़्तसर मोहब्बत। क़दीम रूमी नवार का तंक़ीदी नज़र फ़िलहाल हाल के अस्बाब - जहाज़ों और सियाह की तादाद व कारगुज़ारियां - दर्रह-ए दनियाल के क़ुदरती ताता क़िले हैं। अफ़वाज-ए मुत्तहिदा की अन थक कोशिश जा दरानों की बज़रद कारगुज़ारियां भी मोहब्बत की एक बिलक बरी ज़र्सर हालात निहायत मतलूब पुराने में बयान किए गए हैं।
1916