जावेद अख़्तर बेदी के शेर
वो आदमी जो किसी पर सितम न देख सके
मुझे वो देखने वाला दिखाई देता है
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कुछ यूँ फ़ना हुआ हूँ मोहब्बत की आग में
दुनिया को दे चला हूँ कहानी मलाल की
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टैग : आग
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'बेदी' मरीज़ दिल का हूँ और दर्द का सफ़ीर
मर जाऊँगा न उस ने अगर देख-भाल की