जावेद अहमद के शेर
चंद शाइ'र हैं जो इस शहर में मिल बैठते हैं
वर्ना लोगों में वो नफ़रत है कि दिल बैठते हैं
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere