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ख़ालिद इक़बाल यासिर

1952 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 17

शेर 12

रहती है साथ साथ कोई ख़ुश-गवार याद

तुझ से बिछड़ के तेरी रिफ़ाक़त गई नहीं

लगता है ज़िंदा रहने की हसरत गई नहीं

मर के भी साँस लेने की आदत गई नहीं

हाँ ये मुमकिन है मगर इतना ज़रूरी भी नहीं

जो कोई प्यार में हारा वही फ़नकार हुआ

भूल जाना था जिसे सब्त है दिल पर मेरे

याद रखना था जिसे उस को भुला बैठा हूँ

पलट के आए आए कोई सुने सुने

सदा का काम फ़ज़ाओं में गूँजते तक है

पुस्तकें 43

अदबी फ़िकरी तहरीकात और इक़बाल

 

 

Adbi Jaize

Kul Pakistan Ahl-e-Qalam Conference

1986

Adbi Rujhanat

Pakistani Zubanon Ke Adab Par Maqalat

1984

Ahwal-o-Aasar

 

1993

अल्फ़्रेड नॉबेल

 

2002

Andaz

 

1995

Bulugh-ul-Arab

Volume-003

2002

Bulugh-ul-Arab

Volume-004

2002

Dar-o-Bast

 

1990

Dar-o-Bast

 

2004