ग़ज़ल 3

 

शेर 2

दिल तोड़ने वाले को ख़बर हो कि अभी मैं

सर-ता-ब-क़दम इक दिल-ए-बीमार नहीं हूँ

झूट होंटों पे बिला-ख़ौफ़-ओ-ख़तर आया है

मुद्दतों शहर में रह कर ये हुनर आया है