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ख़ालिद मीनाई

शेर 1

झोंके नसीम-ए-ख़ुल्द के होने लगे निसार

जन्नत को इस गुलाब का था कब से इंतिज़ार

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पुस्तकें 1

Ghairat-e-Baharistan