Khalid Sharif's Photo'

ख़ालिद शरीफ़

1947 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 9

नज़्म 1

 

शेर 9

बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई

इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया

'ख़ालिद' मैं बात बात पे कहता था जिस को जान

वो शख़्स आख़िरश मुझे बे-जान कर गया

आसमाँ झाँक रहा है 'ख़ालिद'

चाँद कमरे में मिरे उतरा है

क़ितआ 1