मंसूर मुल्तानी के शेर
लरज़ती छत शिकस्ता बाम-ओ-दर से बात करनी है
मुझे तन्हाई में कुछ अपने घर से बात करनी है
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere