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मिर्ज़ा फ़ख़रुद्दीन फ़ख़्र

- 1940

शेर 1

सर्राफ़ कसौटी पे घिसा करते हैं ज़र को

हम वो हैं जो आँखों से परखते हैं बशर को

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