मुहम्मद अली अयाज़ के शेर
भाप उड़-उड़ के मेरी चाय से
उस का पैकर बनाती रहती है
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टैग : चाय
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere