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मोहम्मद अल्वी

1927 - 2018 | अहमदाबाद, भारत

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

ग़ज़ल

क्या कहते क्या जी में था

मोहम्मद अल्वी

चाँद की कगर रौशन

मोहम्मद अल्वी

ज़मीन लोगों से डर गई है

मोहम्मद अल्वी

रात के मुँह पर उजाला चाहिए

मोहम्मद अल्वी

लबों पर यूँही सी हँसी भेज दे

मोहम्मद अल्वी

शरीफ़े के दरख़्तों में छुपा घर देख लेता हूँ

मोहम्मद अल्वी

अचानक तिरी याद का सिलसिला

नोमान शौक़

ऑफ़िस में भी घर को खुला पाता हूँ मैं

नोमान शौक़

कोई बैंड-बाजा सा कानों में था

नोमान शौक़

दिन इक के बा'द एक गुज़रते हुए भी देख

नोमान शौक़

दिन भर के दहकते हुए सूरज से लड़ा हूँ

नोमान शौक़

बरसों घिसा-पिटा हुआ दरवाज़ा छोड़ कर

नोमान शौक़

मैं अपने आप से डरने लगा था

नोमान शौक़

वो मेरे साथ आने पे तय्यार हो गया

नोमान शौक़

शरीफ़े के दरख़्तों में छुपा घर देख लेता हूँ

नोमान शौक़

अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे करिश्मे सारे उसे आज ही दिखाने थे

आतिर अली सय्यद

नज़्म

अब जिधर भी जाते हैं

नोमान शौक़

आख़िरी दिन की तलाश

नोमान शौक़

ख़ुदा कहाँ है

नोमान शौक़

ख़ाली मकान

नोमान शौक़

घोड़े पर इक लाश

नोमान शौक़

ड्रैकुला

नोमान शौक़

डिप्रेशन

नोमान शौक़

तख़्लीक़

नोमान शौक़

बंद घर और चिड़िया

नोमान शौक़

बदन का फ़ैसला

नोमान शौक़

बाएँ आँख में तिल वाले की ज़बानी

नोमान शौक़

मछली की बू

नोमान शौक़

मुझे उन जज़ीरों में ले जाओ

नोमान शौक़

अकेली औरत और टी-वी

आतिफ़ बलोच

आख़िरी दिन की तलाश

आतिफ़ बलोच

खिलौने

आतिफ़ बलोच

जुर्म ओ सज़ा

आतिफ़ बलोच

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI