मोहम्मद सिद्दीक़ ज़िया के शेर
तुम्हारी ज़ुल्फ़ में पहुँची तो रौशनी कहलाई
वो तीरगी जो मिरे नामा-ए-सियाह में है
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere