ग़ज़ल 8

शेर 5

बात ये है कि बात कोई नहीं

मैं अकेला हूँ साथ कोई नहीं

इस को मैं इंक़लाब कहता हूँ

ये जो इंकार की फ़ज़ा से उठा

पस-ए-पर्दा बहुत बे-पर्दगी है

बहुत बेज़ार है किरदार अपना

पुस्तकें 2

ईक़ान

 

2019

 

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