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नजीबा आरिफ़

ग़ज़ल 1

 

शेर 1

ख़याल अपना कमाल अपना उरूज अपना ज़वाल अपना

ये किन भुलैयों में डाल रखा है कैसी लीला रची हुई है

 

कहानी 1

 

पुस्तकें 4

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शुमारा नम्बर-002

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