ग़ज़ल 40

शेर 2

दर्द की लहर में ज़िंदगी बह गई

उम्र यूँ कट गई हिज्र की शाम में

आख़िरी बार आया था मिलने कोई

हिज्र मुझ को मिला वस्ल की शाम में

 

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