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नख़्शब जार्चवि

1920 - 1967 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 11

शेर 2

वा'दे का ए'तिबार तो है वाक़ई मुझे

ये और बात है कि हँसी गई मुझे

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कोई किस तरह राज़-ए-उल्फ़त छुपाए

निगाहें मिलीं और क़दम डगमगाए

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पुस्तकें 1

मशअल-ए-राह