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क़ाज़ी महमूद बेहरी

1684 - 1724 | दक्कन, भारत

ग़ज़ल 6

शेर 2

बर-अक्स क्यूँ हुआ है ज़माने के फेर में

हैराँ है कोई दुख में किसे दस्तरस हुआ

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यक नुक्ता नुक्ता-दाँ कूँ है काफ़ी शनास का

क़िस्सा-ख़्वाँ बोल हिकायत क़यास का

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पुस्तकें 2

कुल्लियात-ए-बहरी

 

1939

Man Lagan

 

1955

 

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