Rafia Shabnam Abidi's Photo'

रफ़ीआ शबनम आबिदी

1943 | मुंबई, भारत

रफ़ीआ शबनम आबिदी के ऑडियो

ग़ज़ल

अब्र छाया था फ़ज़ाओं में तिरी बातों का

अज़रा नक़वी

ख़ुद-फ़रेबी है दग़ा-बाज़ी है अय्यारी है

अज़रा नक़वी

घिरे हैं चारों तरफ़ बेकसी के बादल फिर

अज़रा नक़वी

ना-रसाई का चलो जश्न मनाएँ हम लोग

अज़रा नक़वी

बदलती रुत पे हवाओं के सख़्त पहरे थे

अज़रा नक़वी

भूल जाते हैं तक़द्दुस के हसीं पल कितने

अज़रा नक़वी

रोज़ उठता है धुआँ कोह-ए-निदा के उस पार

अज़रा नक़वी

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI