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रिफ़अत सुलतान

ग़ज़ल 15

शेर 8

उम्र भर तुझ को देखने पर भी

ज़ौक़-ए-नज़्ज़ारा कम नहीं होता

ग़म-ए-हयात से इतनी भी है कहाँ फ़ुर्सत

कि तेरी याद में जी भर के रो लिया जाए

जलता रहा हूँ ज़ीस्त के दोज़ख़ में उम्र भर

ये और बात है मिरी कोई ख़ता नहीं

ई-पुस्तक 4

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2001

Basheer Badr: Fan-o-Shakhsiyat

 

1988

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2014

 

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