noImage

सबा अख़्तर

सबा अख़्तर के शेर

मैं बाज़गश्त-ए-दिल हूँ पैहम शिकस्त-ए-दिल हूँ

वो आज़मा रहा हूँ जो आज़मा चुका हूँ