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सज्जाद बलूच

1976

ग़ज़ल 16

शेर 2

अफ़्सोस ये वबा के दिनों की मोहब्बतें

इक दूसरे से हाथ मिलाने से भी गए

राह का शजर हूँ मैं और इक मुसाफ़िर तू

दे कोई दुआ मुझ को ले कोई दुआ मुझ से

 

पुस्तकें 1

हिजरत-ओ-हिज्र

 

2013