सलमान ख़लील का परिचय
उपनाम : 'सलमान ख़लील'
मूल नाम : सलमान ख़लील
जन्म : 02 May 1964 | अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
संबंधी : ख़लील-उर-रहमान आज़मी (पिता)
डॉ. सलमान ख़लील वर्ष 2001 से जे.एन. मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग में कार्यरत हैं। वर्ष 2023 में उन्हें प्रोफेसर (बायो-स्टैटिस्टिक्स) के पद पर पदोन्नत किया गया।
उन्हें स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर 25 वर्षों से अधिक का शिक्षण अनुभव है। उनका प्रमुख शिक्षण क्षेत्र बायो-स्टैटिस्टिक्स एवं रिसर्च मेथडोलॉजी है। उन्होंने 34 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों व कार्यशालाओं में भाग लिया है, 10 शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं तथा 47 शोध पत्र राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
वे 15 एम.डी. शोध प्रबंधों तथा 12 एम.एससी. (होम साइंस) परियोजनाओं के सह-पर्यवेक्षक रह चुके हैं। उन्होंने यूनिसेफ के पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम में 12 वर्षों तक बायो-स्टैटिस्टिशियन के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें यूपीएससी के साक्षात्कार हेतु विशेषज्ञ के रूप में नामित किया गया।
डॉ. ख़लील संस्थागत नैतिक समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। वे जामिया हमदर्द, नई दिल्ली में मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थैरेपी के लिए बाह्य परीक्षक नियुक्त किए गए। वे जे.एन.एम.सी., ए.एम.यू. के चिकित्सा संकाय में दो वर्षों तक फैकल्टी सदस्य रहे। साथ ही, उन्हें होम साइंस विभाग तथा ओरल पैथोलॉजी/ओरल मेडिसिन एवं रेडियोलॉजी विभाग के बोर्ड ऑफ स्टडीज़ का सदस्य भी नियुक्त किया गया।
वे एम.डी., एम.बी.बी.एस., एम.डी.एस., पीएच.डी. (होम साइंस), बी.एससी. (नर्सिंग) एवं बी.एससी. (फिजियोथेरेपी) के विद्यार्थियों को बायो-स्टैटिस्टिक्स का अध्यापन भी कर रहे हैं।
डॉ. सलमान ख़लील ‘इंडियन जर्नल ऑफ लाइफ साइंसेज़’ (वाराणसी) की शैक्षणिक बोर्ड के सदस्य रहे हैं। वे ‘इंडियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन’ (बीएचयू), सोशल मेडिसिन एसोसिएशन पंजाब तथा इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी हेल्थ के आजीवन सदस्य हैं।
उन्हें वर्ष 2020 में हैदराबाद में आयोजित 10वें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पुरस्कार समारोह में ‘बेस्ट रिसर्चर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, उन्हें वर्ष 2021 में सी-पेस (CPACE) द्वारा बायो-स्टैटिस्टिक्स में शिक्षण एवं शोध उत्कृष्टता हेतु ‘इंटरनेशनल एजुकेशन एक्सीलेंस अवॉर्ड’ भी प्रदान किया गया।