Sattar Syed's Photo'

सत्तार सय्यद

1949 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 11

शेर 6

सहर को साथ उड़ा ले गई सबा जैसे

ये किस ने कर दिए रस्ते धुआँ धुआँ मेरे

लहू में फूल खिलाने कहाँ से आते हैं

नए ख़याल जाने कहाँ से आते हैं

कब बन-बास कटे इस शहर के लोगों का

क़ुफ़्ल खुलें कब जाने बंद मकानों के

यूँ एहतिमाम-ए-रद्द-ए-सहर कर दिया गया

हर रौशनी को शहर-बदर कर दिया गया

समुंदरों को सिखाता है कौन तर्ज़-ए-ख़िराम

ज़मीं की तह में ख़ज़ाने कहाँ से आते हैं

चित्र शायरी 1

वो चराग़ सा कफ़-ए-रहगुज़ार में कौन था मैं कहाँ था और मिरे इंतिज़ार में कौन था कोई धूल उड़ती थी रास्तों पे न खुल सका वो ग़नीम था कि कुमक ग़ुबार में कौन था कोई शाम हल्क़ा-ए-दोस्ताँ में गुज़ारता जिसे जा के मिलता मैं उस दयार में कौन था मिरे ख़्वाब किस ने चुरा लिए सर-ए-शाम-ए-ग़म मिरी उम्र जिस के थी इख़्तियार में कौन था