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शबाना यूसुफ़

लंदन, यूनाइटेड किंगडम

ग़ज़ल 8

शेर 8

ख़ुद चराग़ों को अंधेरों की ज़रूरत है बहुत

रौशनी हो तो उन्हें लोग बुझाने लग जाएँ

इक यही सोच बिछड़ने नहीं देती तुझ से

हम तुझे बाद में फिर याद आने लग जाएँ

मुझ को भी कर देगा रुस्वा वो ज़माने भर में

ख़ुद भी हो जाएगा बदनाम यही लगता है

ई-पुस्तक 1

 

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