ग़ज़ल 8

शेर 8

ख़ुद चराग़ों को अंधेरों की ज़रूरत है बहुत

रौशनी हो तो उन्हें लोग बुझाने लग जाएँ

इक यही सोच बिछड़ने नहीं देती तुझ से

हम तुझे बाद में फिर याद आने लग जाएँ

मेरे आने की ख़बर सुन के वो दौड़ा आता

उस को पहुँचा नहीं पैग़ाम यही लगता है

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