aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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शहाब अशरफ़

1925

शहाब अशरफ़

ग़ज़ल 15

अशआर 2

उतनी ही निगाहों की मिरी प्यास बढ़ी है

जितनी कि तुझे देख के तस्कीन हुई है

ख़ून ये जाता रगों से फूट कर

रो लिए तो दिल ज़रा हल्का हुआ

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