शर्क़ी ख़लदी के शेर
डरता हूँ ख़ुदा से कि न सुन ले मिरी आवाज़
मरता हूँ कि मैं तुझ को ख़ुदा कह के पुकारूँ
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere