शौकत रिज़वी के शेर
या हुस्न हुआ मजबूर-ए-करम या इश्क़ ने मंज़िल पाली है
वो ज़ुल्फ़ बिखेरे आए हैं इक वहशी के समझाने को
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere