Shehpar Rasool's Photo'

शहपर रसूल

1956 | दिल्ली, भारत

महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायरों में विख्यात।

महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायरों में विख्यात।

शहपर रसूल के शेर

मुझे भी लम्हा-ए-हिजरत ने कर दिया तक़्सीम

निगाह घर की तरफ़ है क़दम सफ़र की तरफ़

मैं ने भी देखने की हद कर दी

वो भी तस्वीर से निकल आया

दूसरों के ज़ख़्म बुन कर ओढ़ना आसाँ नहीं

सब क़बाएँ हेच हैं मेरी रिदा के सामने

रेख़्ता का इक नया मज्ज़ूब है 'शहपर' रसूल

शोहरत उस के नाम पर इक नंग है बोहतान है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI