सवान्ह हयात
श्री १०८ स्वामी राम तीरथ जी एम ए, जिस में उन के तालीमी-ओ-गृहस्थ के सहीह हालात उन के १२४ ख़ुतूत की बिना पर दर्ज किए गए हैं, नीज़ वो तमाम उमूर जो श्री नारायण स्वामी और दीगर की ला-इल्मी या अदम वाक़फ़ियत की वजह से तब्अ न हुए थे, राम प्रेमियों के बहुत अर्थ लिए गए हैं।
1933