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सय्यद बासित हुसैन माहिर लखनवी

ग़ज़ल 1

 

शेर 6

दिल की हर बात कह गए आँसू

गिर के आँखों से रह गए आँसू

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फिरती है तो फिर जाए बदलती है तो बदले

दुनिया की नज़र है मिरी क़िस्मत तो नहीं है

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देख कर काली घटा अहल-ए-क़फ़स

और क्या करते तड़प कर रह गए

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