Tajdar Adil's Photo'

ताजदार आदिल

1955 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 30

शेर 8

वो इस कमाल से खेला था इश्क़ की बाज़ी

मैं अपनी फ़तह समझता था मात होने तक

ज़ख़्म कब का था दर्द उठा है अब

उस के जाने का दुख हुआ है अब

हर मुसाफ़िर के साथ आता है

इक नया रास्ता हमेशा से

तुम्हारी याद बढ़ी और दिल हुआ रौशन

ये एक शम्अ अँधेरे ने ख़ुद जला ली है

मेरी आँखों में ख़्वाब हैं जिस के

उस की आँखों में रत-जगा है अब

पुस्तकें 2

Isbaat

 

1991

Main Aaina Hoon

 

2002