तस्वीर के शेर
मोहब्बत अब तलक रखती है ये तासीर मजनूँ की
कि बिन लैला नहीं खिंचती कहीं तस्वीर मजनूँ की
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चल हवा खा न सबा उस दिल-ए-दिल-गीर को छेड़
क्या मज़ा पाएगी तू ग़ुंचा-ए-तस्वीर को छेड़
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