ग़ज़ल 14

शेर 15

जो चला गया सो चला गया जो है पास उस का ख़याल रख

जो लुटा दिया उसे भूल जा जो बचा है उस को सँभाल रख

ख़ुद अपना साथ भी चुभने लगा था

अजब तन्हाई की आदत हुई थी

आते रहते हैं फ़लक से भी इशारे कुछ कुछ

बात कर लेते हैं हम से चाँद तारे कुछ कुछ

किस की आँखों को नींद चुभती है

कौन जागा रहा है उम्र के साथ

ये कमरा और ये गर्द-ओ-ग़ुबार उस का है

वो जिस ने आना नहीं इंतिज़ार उस का है

वीडियो 4

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Reciting own poetry

यासमीन हबीब

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यासमीन हबीब

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