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ज़ेबा

ग़ज़ल 9

शेर 13

हुआ है इश्क़ में कम हुस्न-ए-इत्तिफ़ाक़ ऐसा

कि दिल को यार तो दिल यार को पसंद हुआ

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पहले क्या था जो किया करते थे तारीफ़ मिरी

अब हुआ क्या जो बुरा हो गया अच्छा हो कर

आप को खो के तुम को ढूँढ लिया

हौसला था ये मेरे ही दिल का

ई-पुस्तक 1

दीवान-ए-ज़ेबा