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हास्य-व्यंग्य

हास्य और व्यंग्य असल में समाज की असमानताओं से फूटता है। अगर किसी समाज को सही ढंग से जानना हो तो उस समाज में लिखा गया हास्यात्मक, व्यंग्यात्मक साहित्य पढ़ना चाहिए। उर्दू में भी हास्यात्मक और व्यंग्यात्मक साहित्य की शानदार परंपरा रही है। मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी, पतरस बुख़ारी, रशीद अहमद सिद्दीक़ी और बेशुमार अदीबों ने बेहतरीन हास्यात्मक, व्यंग्यात्मक लेख लिखे हैं। रेख़्ता पर ये गोशा उर्दू में लिखे गए ख़ूबसूरत और मशहूर मज़ाहिया और तन्ज़िया लेखों से आबाद है। पढ़िए और ज़िंदगी को ख़ुशगवार बनाइऐ।

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पतरस बुख़ारी

मरहूम की याद में

पतरस बुख़ारी

कुत्ते

पतरस बुख़ारी

चारपाई

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मुरीदपुर का पीर

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हुए मर के हम जो रुस्वा

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी

चचा छक्कन ने तस्वीर टांगी

सय्यद इम्तियाज़ अली ताज

पड़िए गर बीमार

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी

ग़ालिब फिर इस दुनिया में

फ़िराक़ गोरखपुरी

जुनून-ए-लतीफ़ा

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी

मौलवी साहब की बीवी

मिर्ज़ा फ़रहतुल्लाह बेग

और आना घर में मुर्ग़ियों का

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी

ग़ालिब के दो सवाल

कन्हैया लाल कपूर

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मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी

बीवी कैसी होना चाहिए

चौधरी मोहम्मद अली रुदौलवी

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पतरस बुख़ारी

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पतरस बुख़ारी

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ग़ालिब के घर में एक शाम

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दोस्त के नाम

पतरस बुख़ारी

रामायण और महाभारत

इब्न-ए-इंशा

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कन्हैया लाल कपूर

ग़ालिब जन्नत में

सिराज अहमद अलवी

कस्टम का मुशायरा

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सिन्फ़-ए-लाग़र

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी
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