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घुम्मी कबाबी

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घुम्मी कबाबी

घुम्मी कबाबी को कौन नहीं जानता। सारा शहर जानता है। जब तक ये ज़िंदा रहा कबाबों की दुनिया में इससे ज़्यादा दिलचस्प कोई कबाबी न था। जामा मस्जिद की सीढ़ियों से लेकर उधर दिल्ली दरवाज़े तक और इधर हबश ख़ां की फाटक तक उसके कबाब चटख़ारे ले-ले कर खाए जाते थे।

अशरफ़ सबूही
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