मंटो की वो 5 कहानियाँ जिन पर मुक़द्दमे चले

मंटो की कहानियों को

समझे बिना उन पर अश्लीलता का आरोप लगाया जाता रहा है। यहाँ तक कि उनकी कई कहानियों पर मुक़द्दमे भी चले और उन्हें अदालत में हाज़िर होना पड़ा। जबकि उन कहानियों में मंटो ने मानव मन के पोशीदा हिस्से तक रसाई हासिल कर के उन गुत्थियों को सुलझाने की कोशिश की है जो किसी आम इंसान या मामूली रचनाकार की पहुँच से बाहर है।

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ठंडा गोश्त

यह एक सिख नौजवान के नामर्द हो जाने की कहानी है। विभाजन के दौरान हुए दंगों में ईश्वर सिंह गाँव के मुस्लिम मोहल्ले में हुई लूट में शामिल था। वहाँ उसे एक खू़बसूरत लड़की मिलती है। अपनी हवस बुझाने के लिए जैसे ही वह उस पर झुकता है तो उसे पता चलता है कि लड़की तो बिल्कुल ठंडी है। उसे वहीं छोड़कर वह होटल में अपनी दाश्ता कुलवंत के पास आता है, लेकिन लाख कोशिश के बाद भी खु़द को गरम नहीं कर पाता। इससे गुस्साई कुलवंत उसे ख़ंजर घोंप देती है।

सआदत हसन मंटो

खोल दो

अमृतसर से स्शपेशल ट्रेन दोपहर दो बजे को चली और आठ घंटों के बाद मुग़लपुरा पहुंची। रास्ते में कई आदमी मारे गए। मुतअद्दिद ज़ख़्मी हुए और कुछ इधर उधर भटक गए। सुबह दस बजे कैंप की ठंडी ज़मीन पर जब सिराजुद्दीन ने आँखें खोलीं और अपने चारों तरफ़ मर्दों, औरतों

सआदत हसन मंटो

बू

यह एक घाटन लड़की के जिस्म से पैदा होने वाली बू की कहानी है। रणधीर सिंह एक खू़बसूरत नौजवान और औरतों के मामले में मंझा हुआ खिलाड़ी है। लेकिन उसे जो लज्ज़त घाटन लड़की के जिस्म से महसूस होती है वह उसने आज तक किसी और औरत में महसूस नहीं की थी। रणधीर को पसीने की बू से सख़्त नफ़रत है। फिर वह उस घाटन लड़की के जिस्म की बू को अपनी रग-रग में बसा लेने के लिए तड़पता रहता है।

सआदत हसन मंटो

काली शलवार

एक पेशा करने वाली औरत सुल्ताना की आत्मा की पीड़ा और उसके अंत: के सन्नाटे को इस कहानी में बयान किया गया है। पहले ख़ुदा-बख़्श उसे प्यार का झांसा देकर अंबाला से दिल्ली लेकर आता है और उसके बाद शंकर मात्र काली शलवार के बदले उसके साथ जिस तरह का फ़रेब करता है इससे अंदाज़ा होता है कि मर्द की नज़र में औरत की हैसियत केवल एक खिलौने की सी है। उसके दुख-दर्द और इसके नारीत्व की उसे कोई परवाह नहीं।

सआदत हसन मंटो

धुआँ

यह कहानी वयस्कता के मनोविज्ञान पर आधारित है। एक ऐसे बच्चे की भावनाओं को चित्रित किया गया है जो कामोत्तेजना की दहलीज़ पर क़दम रख रहा है और वह अपने अंदर होने वाले बदलाव को महसूस तो कर रहा है मगर समझ नहीं पा रहा है। त्रास्दी ये है कि उसकी भावनाओं को सही दिशा देने वाला कोई नहीं है।  

सआदत हसन मंटो

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