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Phool Acche Hain

Product Details

Author: Vijendra Singh Parwaz
Language: Hindi
Publisher: Rekhta Publications
Year: 2026 (1st Edition)

Also available on

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About This Book

About the Book: "विजेंद्र  सिंह ‘परवाज़’ का ग़ज़ल-संग्रह ‘फूल अच्छे हैं’ मोहब्बत, इंसानी रिश्तों और समाज की सच्चाइयों को शायरी में पिरोने की एक ख़ूबसूरत कोशिश है। परवाज़ अपनी रूमानी और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी ग़ज़लों के लिए जाने जाते हैं। उनकी शायरी में इश्क़ की गहराई और जुदाई का दर्द है, तो दूसरी ओर वक़्त के बदलते मिज़ाज, सामाजिक दोहरेपन और इंसान के संघर्ष की झलक भी मिलती है। उनके शेर रोज़मर्रा की ज़िंदगी के अनुभवों को असरदार अंदाज़ में बयान करते हैं। कहीं मोहब्बत के सामने खड़ी मज़हबी दीवारों का एहसास है, कहीं टूटते ख़्वाबों की कसक, तो कहीं झूठ के बाज़ार में अपनी सच्चाई बचाए रखने की जद्दोजहद। उनकी भाषा की सादगी, ख़यालों की गहराई और कहने का बेबाक अंदाज़ शेरों को दिल के क़रीब ले आता है। मुशायरों में अपनी ख़ास पहचान रखने वाले परवाज़ की ग़ज़लें सुनने वालों पर गहरा असर छोड़ती हैं। ‘फूल अच्छे हैं’ उनके ऐसे ही शेरों का संग्रह है, जिसमें प्रेम की कोमल भावनाओं के साथ जीवन और समाज को देखने वाली एक जागरूक नज़र भी दिखाई देती है।"

 

About the Author: "विजेंद्र सिंह ‘परवाज़’ हिंदी और उर्दू के जाने-माने शायर और साहित्यकार हैं। उनका जन्म 28 मार्च, 1943 को उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले के ग्राम भूनी (सरधना) में हुआ। उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए. किया और 1965 से लगातार साहित्य-सृजन कर रहे हैं। उनकी रचनाओं में मौलिक चिंतन और जीवन के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती है। परवाज़ ने हिंदी और उर्दू, दोनों भाषाओं में रचनाएँ की हैं। उर्दू में ग़ालिब, इक़बाल और मजाज़ तथा हिंदी में कबीर, तुलसी, निराला और दिनकर जैसे साहित्यकारों का उनकी सोच और लेखन पर प्रभाव रहा है। उन्होंने ग़ज़ल, कविता, खंड-काव्य, महाकाव्य और गद्य सहित साहित्य की कई विधाओं में लेखन किया है। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में ‘रोटी का पेड़’, ‘प्यासा रहा दरिया’, ‘ग़ज़ल की बात करूँ’, ‘टुकड़े-टुकड़े चाँद’, ‘बादल-बादल तस्वीरें’, ‘आँसू पिरोती है ग़ज़ल’ और ‘बाबा साहब ज़िंदाबाद’ प्रमुख हैं। अंग्रेज़ी में भी उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उनकी रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के साथ दूरदर्शन और आकाशवाणी से प्रसारित हुई हैं। देश-विदेश में काव्य-पाठ और साहित्यिक आयोजनों में भागीदारी के साथ उन्हें अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया है।""विजेंद्र सिंह ‘परवाज़’ हिंदी और उर्दू के जाने-माने शायर और साहित्यकार हैं। उनका जन्म 28 मार्च, 1943 को उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले के ग्राम भूनी (सरधना) में हुआ। उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए. किया और 1965 से लगातार साहित्य-सृजन कर रहे हैं। उनकी रचनाओं में मौलिक चिंतन और जीवन के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती है। परवाज़ ने हिंदी और उर्दू, दोनों भाषाओं में रचनाएँ की हैं। उर्दू में ग़ालिब, इक़बाल और मजाज़ तथा हिंदी में कबीर, तुलसी, निराला और दिनकर जैसे साहित्यकारों का उनकी सोच और लेखन पर प्रभाव रहा है। उन्होंने ग़ज़ल, कविता, खंड-काव्य, महाकाव्य और गद्य सहित साहित्य की कई विधाओं में लेखन किया है। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में ‘रोटी का पेड़’, ‘प्यासा रहा दरिया’, ‘ग़ज़ल की बात करूँ’, ‘टुकड़े-टुकड़े चाँद’, ‘बादल-बादल तस्वीरें’, ‘आँसू पिरोती है ग़ज़ल’ और ‘बाबा साहब ज़िंदाबाद’ प्रमुख हैं। अंग्रेज़ी में भी उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उनकी रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के साथ दूरदर्शन और आकाशवाणी से प्रसारित हुई हैं। देश-विदेश में काव्य-पाठ और साहित्यिक आयोजनों में भागीदारी के साथ उन्हें अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया है।""विजेंद्र सिंह ‘परवाज़’ हिंदी और उर्दू के जाने-माने शायर और साहित्यकार हैं। उनका जन्म 28 मार्च, 1943 को उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले के ग्राम भूनी (सरधना) में हुआ। उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए. किया और 1965 से लगातार साहित्य-सृजन कर रहे हैं। उनकी रचनाओं में मौलिक चिंतन और जीवन के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती है। परवाज़ ने हिंदी और उर्दू, दोनों भाषाओं में रचनाएँ की हैं। उर्दू में ग़ालिब, इक़बाल और मजाज़ तथा हिंदी में कबीर, तुलसी, निराला और दिनकर जैसे साहित्यकारों का उनकी सोच और लेखन पर प्रभाव रहा है। उन्होंने ग़ज़ल, कविता, खंड-काव्य, महाकाव्य और गद्य सहित साहित्य की कई विधाओं में लेखन किया है। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में ‘रोटी का पेड़’, ‘प्यासा रहा दरिया’, ‘ग़ज़ल की बात करूँ’, ‘टुकड़े-टुकड़े चाँद’, ‘बादल-बादल तस्वीरें’, ‘आँसू पिरोती है ग़ज़ल’ और ‘बाबा साहब ज़िंदाबाद’ प्रमुख हैं। अंग्रेज़ी में भी उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उनकी रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के साथ दूरदर्शन और आकाशवाणी से प्रसारित हुई हैं। देश-विदेश में काव्य-पाठ और साहित्यिक आयोजनों में भागीदारी के साथ उन्हें अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया है।"

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