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बशर नवाज़

1935 - 2015 | औरंगाबाद, भारत

प्रख्यात प्रगतिशील शायर, आलोचक, स्क्रिप्ट लेखक और गीतकार, फ़िल्म बाज़ार के गीत "करोगे याद तो हर बात याद आएगी" के लिए प्रसिद्ध

प्रख्यात प्रगतिशील शायर, आलोचक, स्क्रिप्ट लेखक और गीतकार, फ़िल्म बाज़ार के गीत "करोगे याद तो हर बात याद आएगी" के लिए प्रसिद्ध

बशर नवाज़

ग़ज़ल 19

नज़्म 16

अशआर 12

करोगे याद तो हर बात याद आएगी

गुज़रते वक़्त की हर मौज ठहर जाएगी

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दे निशानी कोई ऐसी कि सदा याद रहे

ज़ख़्म की बात है क्या ज़ख़्म तो भर जाएँगे

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प्यार के बंधन ख़ून के रिश्ते टूट गए ख़्वाबों की तरह

जागती आँखें देख रही थीं क्या क्या कारोबार हुए

कहते कहते कुछ बदल देता है क्यूँ बातों का रुख़

क्यूँ ख़ुद अपने-आप के भी साथ वो सच्चा नहीं

जाने किन रिश्तों ने मुझ को बाँध रक्खा है कि मैं

मुद्दतों से आँधियों की ज़द में हूँ बिखरा नहीं

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