उर्दू ज़बान-ओ-अदब की अपनी एक भरपूर परंपरा रही है, जिसमें ज़िंदगी, समाज और शेर-ओ-अदब से जुड़े तजरबों, ख़यालों और एहसासों की वसीअ दुनिया आबाद है। स्कॉलर्स और आलोचकों ने इस पर मुख़्तलिफ़ ज़ावियों और पहलुओं से लिखा है। यह इल्मी और अदबी ज़ख़ीरा लंबे लेखों की शक्ल में मौजूद है। रेख़्ता स्कॉलर इसी ज़ख़ीरे तक पहुँचने की एक कोशिश है, जहाँ इन लेखों की अहम और दिलचस्प बातों को छोटे और आसान रूप में पेश किया गया है।
अठारहवीं सदी के उर्दू शायर मीर तक़ी मीर और उन्नीसवीं सदी के फ्रांसीसी शायर चार्ल्स बोदलेयर की बिल्लियों पर लिखी गई नज़्मों का हैरत-अंगेज़ तुलनात्मक अध्ययन।
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