aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "Dear"
ज़ुलेख़ा-ए-अज़ीज़ाँ बात ये हैभला घाटे का सौदा क्यों करें हम
आज मुश्किल था सँभलना ऐ दोस्ततू मुसीबत में अजब याद आया
दिल मुद्दई के हर्फ़-ए-मलामत से शाद हैऐ जान-ए-जाँ ये हर्फ़ तिरा नाम ही तो है
किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँतुम मिरी ज़िंदगी की आदत हो
हाँ वो नहीं ख़ुदा-परस्त जाओ वो बेवफ़ा सहीजिस को हो दीन ओ दिल अज़ीज़ उस की गली में जाए क्यूँ
अव्वल अव्वल की मोहब्बत के नशे याद तो करबे-पिए भी तिरा चेहरा था गुलिस्ताँ जानाँ
अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँयाद क्या तुझ को दिलाएँ तिरा पैमाँ जानाँ
होश आया तो सभी ख़्वाब थे रेज़ा रेज़ाजैसे उड़ते हुए औराक़-ए-परेशाँ जानाँ
अब के कुछ ऐसी सजी महफ़िल-ए-याराँ जानाँसर-ब-ज़ानू है कोई सर-ब-गरेबाँ जानाँ
जिस को देखो वही ज़ंजीर-ब-पा लगता हैशहर का शहर हुआ दाख़िल-ए-ज़िंदाँ जानाँ
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