aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "busy"
हम हैं मसरूफ़-ए-इंतिज़ाम मगरजाने क्या इंतिज़ाम कर रहे हैं
तू जीवन की भरी गलीमैं जंगल का रस्ता हूँ
वो मुसाफ़िर ही खुली धूप का थासाए फैला के शजर क्या करते
है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम हैकहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बद-मिज़ाज सी शाम है
मैं तो रहता हूँ दश्त में मसरूफ़क़ैस करता है काम-काज मिरा
हम मुसाफ़िर यूँही मसरूफ़-ए-सफ़र जाएँगेबे-निशाँ हो गए जब शहर तो घर जाएँगे
क़लंदर जुज़ दो हर्फ़-ए-ला-इलाह कुछ भी नहीं रखताफ़क़ीह-ए-शहर क़ारूँ है लुग़त-हा-ए-हिजाज़ी का
उन का ये कहना सूरज ही धरती के फेरे करता हैसर-आँखों पर सूरज ही को घूमने दो ख़ामोश रहो
मेरी हस्ती शौक़-ए-पैहम मेरी फ़ितरत इज़्तिराबकोई मंज़िल हो मगर गुज़रा चला जाता हूँ मैं
आतिश-परस्त कहते हैं अहल-ए-जहाँ मुझेसरगर्म-ए-नाला-हा-ए-शरर-बार देख कर
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