aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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क्या भला साग़र-ए-सिफ़ाल कि हमनाफ़-प्याले को जाम कर रहे हैं
हाए 'जौन' उस का वो पियाला-ए-नाफ़जाम ऐसा कोई मिला ही नहीं
हम से छिना है नाफ़-पियाला तिरा मियाँगोया अज़ल से हम सफ़-ए-लब-तिश्नगाँ के थे
अर्ग़वानी था वो पियाला-ए-नाफ़हम जो थे अर्ग़वानियाँ थे हम
जानी मैं तेरे नाफ़-पियाले पे हूँ फ़िदाये और बात है तिरा पैकर भी कुछ नहीं
उस शिकम-रक़्स-गर के साइल होनाफ़-प्याले की तुम अता माँगो
वो नहीं मिली हम को हुक बटन सरकती जीनज़िप के दाँत खुलते ही आँख से गिरी चोली
मुश्कीं लिबास-ए-काबा अली के क़दम से जाननाफ़-ए-ज़मीन है न कि नाफ़-ए-ग़ज़ाल है
मेरी इक शर्ट में कल उस ने बटन टाँका थाशहर के शोर में चूड़ी की खनक आज भी है
हल्क़ा की नाफ़-ए-यार के ता'रीफ़ क्या करूँगोल ऐसा दायरा नहीं परकार ने किया
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