aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "criticism"
तन्क़ीद-ए-हुस्न मस्लहत-ए-ख़ास-ए-इश्क़ हैये जुर्म गाह गाह किए जा रहा हूँ मैं
बिगाड़ पर है जो तन्क़ीद सब बजा लेकिनतुम्हारे हिस्से के जो काम थे सँवारे भी
सब लोग लिए संग-ए-मलामत निकल आएकिस शहर में हम अहल-ए-मोहब्बत निकल आए
लब उतर आए हैं वो तारीफ़ परहम जो आदी हो गए दुश्नाम के
वो संग-ए-मलामत था जिस को तिरा दिल कह करउस कूचे से मुझ जैसा रह-गीर उठा लाया
हमें भी शौक़ है अपनी तरफ़ से जीने काहमारा नाम भी कीजे इ'ताब में शामिल
मास्टर साहब के ग़ुस्से का सबबबे-ख़ता मा'सूम बच्चों पर खुला
ग़ज़ब वो चंचल की शोख़-बीनी फिर उस पे नथुनों की नुक्ता-चीनीफिर उस पे नथ की वो हम-नशीनी फिर उस पे मोती फड़क रहा है
बज़्म-ए-अग़्यार सही अज़-रह-ए-तन्क़ीद सहीशुक्र है हम भी कहीं याद किए जाते हैं
नक़्क़ाद तुम को पूछते आए थे कल 'शुजा'कहते थे शाइ'रों में तुम्हारा भी नाम है
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