aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "danger"
किया ख़ाक आतिश-ए-इश्क़ ने दिल-ए-बे-नवा-ए-'सिराज' कूँन ख़तर रहा न हज़र रहा मगर एक बे-ख़तरी रही
जिस के आग़ोश का हूँ दीवानाउस के आग़ोश ही से ख़तरा है
अब नहीं कोई बात ख़तरे कीअब सभी को सभी से ख़तरा है
हाल ख़ुश लखनऊ का दिल्ली काबस उन्हें 'मुसहफ़ी' से ख़तरा है
'जौन' ही तो है 'जौन' के दरपय'मीर' को 'मीर' ही से ख़तरा है
है कुछ ऐसा कि उस की जल्वत मेंहमें अपनी कमी से ख़तरा है
है अजब तौर हालत-ए-गिर्याकि मिज़ा को नमी से ख़तरा है
शहर-ए-ग़द्दार जान ले कि तुझेएक अमरोहवी से ख़तरा है
किस तरह काटे कोई शब-हा-ए-तार-ए-बर्शिगालहै नज़र ख़ू-कर्दा-ए-अख़्तर-शुमारी हाए हाए
पामाल हम न होते फ़क़त जौर-ए-चर्ख़ सेआई हमारी जान पे आफ़त कई तरह
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