aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "effects"
रह गईं इक तिफ़्ल-ए-मकतब के हुज़ूरहिकमतें आगाहियाँ दानाइयाँ
बिक जाते हैं हम आप मता-ए-सुख़न के साथलेकिन अयार-ए-तबअ-ए-ख़रीदार देख कर
फ़क़ीर-ए-राह को बख़्शे गए असरार-ए-सुल्तानीबहा मेरी नवा की दौलत-ए-परवेज़ है साक़ी
नहीं जाती मता-ए-लाल-ओ-गौहर की गिराँ-याबीमता-ए-ग़ैरत-ओ-ईमाँ की अर्ज़ानी नहीं जाती
बस वही थे मता-ए-दीदा-ओ-दिलजितने आँसू मिज़ा तलक आए
मेरे दिल पर खोल किताबों के असरारमेरी आँख को अपनी साफ़ निशानी दे
आज तक तंज़-ए-मोहब्बत का असर बाक़ी हैक़हक़हे गूँजते फिरते हैं बयाबानों में
तेरी बे-सब्री है 'हसरत' ख़ामकारी की दलीलगिर्या-ए-उश्शाक़ में होती हैं तासीरें कहीं
'असद' ज़िंदानी-ए-तासीर-ए-उल्फ़त-हा-ए-ख़ूबाँ हूँख़म-ए-दस्त-ए-नवाज़िश हो गया है तौक़ गर्दन में
मुमकिन नहीं मता-ए-सुख़न मुझ से छीन लेगो बाग़बाँ ये कुंज-ए-चमन मुझ से छीन ले
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