aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "egg"
सारा ज्वार-भाटा मिरे दिल में है मगरइल्ज़ाम ये भी चाँद के सर जाना चाहिए
क्या तंग हम सितम-ज़दगाँ का जहान हैजिस में कि एक बैज़ा-ए-मोर आसमान है
शोर-ए-तिम्साल है किस रश्क-ए-चमन का या रबआइना बैज़ा-ए-बुलबुल नज़र आता है मुझे
नाला सरमाया-ए-यक-आलम ओ आलम कफ़-ए-ख़ाकआसमाँ बैज़ा-ए-क़ुमरी नज़र आता है मुझे
बजाए दाना ख़िर्मन यक-बयाबाँ बैज़ा-ए-कुमरीमिरा हासिल वो नुस्ख़ा है कि जिस से ख़ाक पैदा हो
टूट जाए अगर तो हर अण्डाकुछ सफ़ेदी है और ज़र्दी है
एक पर्वाज़ को भी रुख़्सत-ए-सय्याद नहींवर्ना ये कुंज-ए-क़फ़स बैज़ा-ए-फ़ौलाद नहीं
मह-जबीनों की मोहब्बत का नतीजा न मिलामुर्ग़ियाँ पालीं मगर एक भी अण्डा न मिला
क्या मुबारक है मिरा दस्त-ए-जुनूँ ऐ 'नासिख़'बैज़ा-ए-बूम भी टूटे तो हुमा पैदा हो
मुझे नई शक्ल की ज़मीं पर है बात करनीमैं बैज़वी गुफ़्तुगू से आगे निकल गया हूँ
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