aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "fellow"
बस इक निगाह से लुटता है क़ाफ़िला दिल कासो रह-रवान-ए-तमन्ना भी डर के देखते हैं
हम-सफ़र चाहिए हुजूम नहींइक मुसाफ़िर भी क़ाफ़िला है मुझे
वो हम-सफ़र था मगर उस से हम-नवाई न थीकि धूप छाँव का आलम रहा जुदाई न थी
हम-पेशा ओ हम-मशरब ओ हमराज़ है मेरा'ग़ालिब' को बुरा क्यूँ कहो अच्छा मिरे आगे
ज़िंदगी के सफ़र में बहुत दूर तक जब कोई दोस्त आया न हम को नज़रहम ने घबरा के तन्हाइयों से 'सबा' एक दुश्मन को ख़ुद हम-सफ़र कर लिया
आख़िर-ए-शब के हम-सफ़र 'फ़ैज़' न जाने क्या हुएरह गई किस जगह सबा सुब्ह किधर निकल गई
जो हम-सफ़र सर-ए-मंज़िल बिछड़ रहा है 'फ़राज़'अजब नहीं है अगर याद भी न आऊँ उसे
गुफ़्तुगू अच्छी लगी ज़ौक़-ए-नज़र अच्छा लगामुद्दतों के बाद कोई हम-सफ़र अच्छा लगा
रौशनी बाँटता हूँ सरहदों के पार भी मैंहम-वतन इस लिए ग़द्दार समझते हैं मुझे
जिन के हम मुंतज़िर रहे उन कोमिल गए और हम-सफ़र शायद
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