aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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तर्जुमान-ए-राज़ हूँ ये भी काम है मिराउस लब-ए-ख़मोश ने मुझ से जो कहा कहूँ
गुफ़्तनी है दिल-ए-पुर-दर्द का क़िस्सा लेकिनकिस से कहिए कोई मुस्तफ़्सिर-ए-हालात तो हो
तुझी को नफ़रत रही है जिन से वो जिन की ताबीर सिर्फ़ तू हैवो आख़िर-ए-शब के ख़्वाब करने पड़ेंगे आख़िर क़ुबूल तुझ को
'एजाज़' अपने अहद का मैं तर्जुमान हूँमैं जानता हूँ जैसी ग़ज़ल चाहते हैं लोग
हर साँस तर्जुमान-ए-ग़म-ए-दिल है इन दिनोंहर आह पर्दा-दार-ए-हिकायत है आज-कल
ज़बाँ करती है दिल की तर्जुमानी देखते जाओपुकार उट्ठी है मेरी बे-ज़बानी देखते जाओ
आँखों में मेरी ख़्वाब हैं ताज़ा सजे हुएताबीर-ए-ख़्वाब ले के वो आया है बरसों बा'द
फ़ितरत-ए-दिल की मेहरबानी हैमैं हूँ या ग़म की तर्जुमानी है
अदब फ़क़त अदब है? या है तर्जुमान-ए-ज़ीस्त?मिरे यही सवाल हैं अदीब अदीब से
शारेह-ए-हाल-ए-दिल समझ मुझ कोदर्द ही दर्द हो गया हूँ मैं
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