aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "plasma"
ख़लिश-ए-ग़म्ज़ा-ए-ख़ूँ-रेज़ न पूछदेख ख़ूँनाबा-फ़िशानी मेरी
ना-गहाँ इस रंग से ख़ूनाबा टपकाने लगादिल कि ज़ौक़-ए-काविश-ए-नाख़ुन से लज़्ज़त-याब था
दिल में अब ताक़त कहाँ ख़ूनाबा-अफ़्शानी करेवर्ना ग़म वो ज़हर है पत्थर को भी पानी करे
बेचैन हूँ ख़ूँनाबा-फ़िशानी में घिरा हूँभीगे हुए लफ़्ज़ों के मआनी में घिरा हूँ
बूँद अश्कों से अगर लुत्फ़-ए-रवानी माँगेबुलबुला आँखों से ख़ूँनाबा-फ़िशानी माँगे
है शब-ए-हिज्राँ तिलिस्म-ए-तीरगी 'अंजुम' दराज़चश्म-ए-गिर्या की है ख़ूँनाबा-फ़िशानी और बस
रोज़-ओ-शब तल्ख़ाबा-ए-हस्ती शाम-ओ-सहर ख़ूनाबा-ए-ग़मअमृत कह कर पी लेते हैं ज़हर-भरे पैमाने लोग
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